मुद्दतें बीत गयी तुम नही आए अब तक
रास्ता और दिखाओगे ना जाने कब तक
जो भी मिलता है वोह तुम सा ही नज़र आता है
दिल की तनहाईयाँ बहलती हैं यूँ भी हमको जैसे
सचमुच ही पुकारा हो तुम्ही ने हमको
पास आते ही मगर ख्वाब बिखर जाता है
जो भी मिलता है वोह तुम सा ही नज़र आता है
वोह हसीं लम्हे जो कल तक थे खाबों की तरह
आज पलकों पे चमक उठते हैं यादों की तरह दर्द रह जाता है और वक़्त गुज़र जाता है
जो भी मिलता है वो तुम सा ही नज़र आता है भेजते हो कभी गुल को तो कभी शबनम को तुम कहाँ कैसे हो मालूम है हर मौसम को चाँद हर शब को तुम्हारी ही ख़बर लाता है जो भी मिलता है वोह तुम सा ही नज़र आता है मुद्दतें बीत गयी तुम नही आए अब तक रास्ता और दिखाओगे ना जाने कब तक जो भी मिलता है वोह तुम सा ही नज़र आता है

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